नेता जी!

नेता जी, लोकतंत्र में हमेशा सुनाने की बजाय कभी-कभी सुनना भी अच्छा होता है। वर्ना पांव के नीचे की ज़मीन खिसकते ज़्यादा देर नहीं लगती, सिर्फ़ पांच साल लगते हैं।

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अधूरी किताबें…

..तब शायद हमें पढ़ी जाने वाली किताबों के ख़िलाफ़, कभी न पढ़ी किताबों की नारेबाज़ी का शोर भी सुनाई देता।

चंडी प्रसाद भट्ट को गांधी शांति पुरस्कार

जानेमाने गांधीवादी और पर्यावरणविद चंडी प्रसाद भट्ट 2013 गांधी शांति पुरस्कार के लिए चुने गए. वे चिपको आंदोलन में सक्रियता के साथ शामिल थे.

चुनाव पूर्व खुली “सर्वेक्षण की पोल”

लोकसभा चुनावों से पहले चुनावी सर्वेक्षणों की तकनीक और विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे है. एक स्टिंग से चुनावी सर्वेक्षणों के दावों की पोल खुल गई है. तो क्या सर्वेक्षणों पर रोक लगा देनी चाहिए.

लोकसभा चुनावों में होगी युवाओं की ‘निर्णायक भूमिका’

आगामी लोकसभा चुनावों में युवा मतदाताओं की भूमिका काफी महत्वपूर्ण है. आज दिल्ली के अख़बारों में इसकी चर्चा है. इसके साथ-साथ रविवार को केजरी-मोदी-राहुल की रैलियों को भी प्रमुखता से पहले पन्ने पर जगह दी गई है. राहुल बिलों का बखान कर रहे हैं तो मोदी पंजे और भ्रष्टाचार को जो़ने के साथ गुजरात मॉडल का पुराना राग अलाप रहे हैं. तो केजरीवाल सीधे राहुल-मोदी-अंबानी और मीडिया को निशाने पर ले रहे हैं. इस पोस्ट में चर्चा सपा की राजनीति की भी.

मीडिया, राजनीति, चुनाव और भाषा

मीडिया का राजनीति से गहरा रिश्ता है. मीडिया और भाषा का रिश्ता तो सर्वविविदित है. चुनाव, भाषा, मीडिया और भारतीय संस्कृति के मूल तत्वों के बीच भी एक सार्थक रिश्ता खोजा जा सकता है.