‘सरकारी स्कूल में अच्छी पढ़ाई नहीं होती’

उत्तर प्रदेश में सरकारी स्कूलों की बदलहाली का लाइव प्रसारण वाराणसी में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की रैली में दिखा. इस दौरान लोगों ने सराकारी स्कूलों की बदहाली का खाका भी पेश किया.

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‘महंगाई’ से मुकाबले को लोकतंत्र और अर्थतंत्र का गठबंधन

आज केंद्रीय मंत्रिमंडल ने लोकसभा चुनाव में उम्मीदवारों द्वारा खर्च की जाने वाली राशि की सीमा चालीस लाख से बढ़ाकर सत्तर लाख रुपए कर दी है. इसका सीधा सा अर्थ है कि अब लोकसभा चुनाव लड़ना और महंगा हो गया है.

सेकुलरिज़म की सियासत

संविधान के अनुसार भारत एक धर्मनिरपेक्ष (सेकुलर) देश है. लेकिन इसके बावजूद भारत में धर्मनिरपेक्षा ता दावा करने और इसका अगुवा होने का दावा करते राजनीतिक दलों की सक्रियता हैरान करती है.

मीडिया, राजनीति, चुनाव और भाषा

मीडिया का राजनीति से गहरा रिश्ता है. मीडिया और भाषा का रिश्ता तो सर्वविविदित है. चुनाव, भाषा, मीडिया और भारतीय संस्कृति के मूल तत्वों के बीच भी एक सार्थक रिश्ता खोजा जा सकता है.

उम्मीदों के आसमान से ‘निराशा की बारिश’

दिल्ली की राजनीति फिर से चर्चा के केंद्र हैं. लेकिन सारी चर्चाओं में आगामी आम चुनाव ही हैं. चुनावों में कभी मोदी के लहर की बात होती है तो कभी आम आदमी पार्टी के लहर की बात होती है. लेकिन मतदाता उलझन की बजाय किसी राह की तलाश में हैं...जनता स्थाई सरकार, सुशासन और जमीनी विकास की कहानी लिखने वाले नायक का चुनाव करने को तैयार दिख रही है.

दिल्ली

किन मुद्दों पर सोच रही है दिल्ली…

आम आदमी पार्टी की सरकार टकराव को निमंत्रण दे रही है. इसके पीछे उसकी मंशा पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं. तो लोगों का कहना है कि दिल्ली तो धरना प्रदेश बनती जा रही है. आपको सुनाते हैं आज हाल-ए-दिल्ली आज दिल्ली डायरी में.

‘पॉलिटिकल वॉर’ में निशाने पर मीडिया…

राजनीतिक दलों के लोग मीडिया से बड़ी मोहब्बत से बात करते हैं. जहाँ तक संभव हो वे मीडिया से वेलेंटाइन की तरह पेश आते हैं. लेकिन राजनीति में दोस्त और दुश्मन बदलते रहते हैं. भारत के पॉलिटिकल वॉर में मीडिया को निशाने बनाने का नया चलन शुरू हुआ है. राजनीतिक दल मीडिया को निशाना क्यों बना रहे हैं और यह कितना सही है? पढ़िए इस पोस्ट में.

सियासत, सत्ता और नारों की जादूगरी…

कोई भी चुनाव, धरना, अनशन, आंदोलन या विरोध-प्रदर्शन बिना नारों के पूरा नहीं होता है. आइए भारतीय राजनीति के दिलचस्प नारों और सियासी जुमले पर एक नज़र डालते हैं.

दिल्ली डायरीः ‘आप’ की सरकार, समस्याओं का अंबार और उम्मीदों का पहाड़

अब दिल्ली में सरकार बनने का रास्ता साफ़ हो गया है. आज दिल्ली से छपने वाले सारे अख़बारों में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने, भावी चुनौतियों और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के राजनीतिक सफ़र की चर्चा है. इसका सीधा असर आज गली में अख़बारों की खुदरा बिक्री पर भी साफ़ दिखाई दिया. समाचारपत्रों की भारी … Continue reading दिल्ली डायरीः ‘आप’ की सरकार, समस्याओं का अंबार और उम्मीदों का पहाड़