सच में दुनिया ‘गाँव’ में तब्दील हो गई है!!

क्या सच में दुनिया एक वैश्विक गाँव बन गई है ? पढ़िए इस पोस्ट में।

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दौरे वाला ‘लोकतंत्र’

महात्मा गांधी कहा करते थे कि असली भारत तो गाँवों में बसता है। आज के हालात दूसरे हैं असली भारत के लोग आत्महत्या को मजूबर हैं और नेता दौरा कर रहे हैं। असली भारत में जाली आश्वासन की खैरात बाँट रहे हैं।

भारत में ‘आदर्श ग्राम’ के मायने क्या है?

आजकल भारत में सांसदों द्वारा गाँवों को गोद लेने का कार्यक्रम जोर-शोर से चल रहा है। इस प्रक्रिया में कितनी सियासत है और किसी गाँव को गोद लेने के मायने क्या है? पढ़िए इस पोस्ट में।

भारत के अख़बारः दिल्ली और बिहार में सरकार की तैयारी

16वीं लोकसभा चुनावों के बाद दिल्ली में सरकार बनाने की कोशिशों को अधिकांश अख़बारों ने प्रमुखता से उठाया है. हिंदुस्तान की सुर्ख़ी है, मोदी सरकार पर मंथन तेज़. इस ख़बर में कयास भारतीय जनता पार्टी के प्रमुख नेताओं के बारे में कयास लगाया गया है कि उनको कौन-कौन सा मंत्रालय मिल सकता है. इस पोस्ट में चर्चा भारत के राजनीतिक घमासान की भी. अंततः जीतन राम माझी बिहार के नए मुख्यमंत्री होने की चर्चा भी शाम से ख़बरों में है.

भारतीय राजनीति में बदलाव का ‘नया दौर’

आज भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को अपनी सरकार का इस्तीफ़ा सौंप दिया. वहीं दूसरी तरफ़ गुजरात के मुख्यमंत्री और भारत के प्रधानमंत्री दिल्ली आए, यहाँ उनका भव्य स्वागत किया गया. सत्ता को विदा कहने और करीब आने का यह लम्हा लोगों को देखने को मिला. वहीं देर शाम बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने लोकसभा चुनावों में पार्टी की करारी हार की जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए, नैतिक आधार पर अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया.

खाली हाथ कांग्रेस, भाजपा की अप्रत्याशित जीत…

16वीं लोकसभा में भाजपा की अप्रत्याशित जीत हो रही है. 1984 के बाद पहली बार कोई पार्टी अपने दम पर सत्ता में वापसी कर रही है. कांग्रेस ऐतिहासिक हार के कगार पर खड़ी है और लोकसभा में उससे विपक्ष का दर्ज़ा भी छिनने वाला है. भारतीय राजनीति में बदलाव की आहट से तमाम पार्टियों के नेता हैरान है. इन चुनावों में तमाम क्षेत्रीय पार्टियों का सूपड़ा साफ़ हो गया.

लोकसभा चुनावः राजनीति के समंदर में आती-जाती लहरें

भारत की जनता को बेसब्री से 16 मई की तारीख़ का इंतज़ार है. जब इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों के माध्यम से मतगणना होगी. लोगों के जनादेश की साफ़ तस्वीर सामने होगी और भविष्य के सरकार का स्वपन साकार हो रहा होगा. राजनीति में लहरों के खेल के समानांतर समंदर में लहरों के ज्वार-भाटे का खेल जारी है, एक नज़र राजनीति के समंदर की सतह पर मचते शोर पर.

नेता और जनता का ‘रोमांस’

जब नेता और जनता के बीच मोहब्बत के चर्चे हों तो समझिए चुनाव करीब आ गए हैं. पढ़िए चुनावी भगदड़ में नेताओं के भाग मिल्खा भाग...फ़़िल्म से प्रभावित होने की कहानी.

भारतीय राजनीति का ‘अनोखा दौर’

वर्तमान में भारतीय राजनीति बड़े 'अनोखे' और 'रोचक' दौर से गुजर रही है. सारी तस्वीर थोड़ी साफ़ और थोड़ी उलझी हुई है. कभी स्वदेशी की अलख जगाने वाले आज चाय पर चर्चा कर रहे हैं. जनता को अपनी जागीर समझने वाले उसके हक़ की बात कर रहे हैं. महिलाओं के प्रति दोहरा नज़रिया रखने वाले उनके सशक्तीकरण की बात कर रहे हैं. क्षेत्रीय दलों की लालटेन का शीशा चटख रहा है. घर के अंदर सफ़ाई का दावा करने वाली झाड़ू अपना काम छोड़कर घर से बाहर घूम रही है.

लाठी और लड़ाई वाला ‘लोकतंत्र’

भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है. चुनावों को लोकतंत्र का महापर्व कहा जाता है. लेकिन 16वीं लोकसभा चुनावों में भारतीय लोकतंत्र की जवानी कम और बचपना ज़्यादा झलक रहा है.

‘अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस’ की हार्दिक शुभकामनाएं

'अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस' एक मौका होता है वैश्विक स्तर पर महिलाओं की ज़िंदगी में होने वाले बदलाव से रूबरू होने का। भारत में महिलाओं की स्थिति में बहुत ज़्यादा अंतर है। उनकी समस्याएं, ख़ुशियां और सफलताएं इतनी अलग हैं कि सबको एक सांचे में रखकर देखना मुश्किल है।

लोकतंत्र का ‘चुनावी मेला’

देश में 16वें लोकसभा चुनावों की घोषणा के बीच हिंसा और अराजकता के नए दौर की शुरूआत हो गई है. महंगे चुनावों के दौरान हर किसी की नज़र वोट और पैसों वाले बैंक की तरफ़ है.

सर्दी में ठिठुरते अख़बार और विज्ञापन की जैकेट

2 मार्च 2014. दिल्ली के अधिकांश बड़े अख़बार यूपी सरकार के विज्ञापन की जैकेट से लैस नज़र आ रहे हैें. ऐसा लग रहा है मानो यूपी में रैली के पहले सपा सरकार की तरफ़ से मीडिया को तोहफा दिया जा रहा हो. कहने को तो यह सरकार के बढ़ते क़दम को दिखाता है. लेकिन किस विकास का प्रचार सपा की सरकार करना चाहती है...यह सवाल बना रहता है. इसके अलावा चर्चा चुनावों की घोषणा और तीसरे मोर्चे की संभवनाओं की भी.