अपनी बात कहने के लिए शब्दों की तलाश क्यों हैं?

लंबे अर्से बाद लिखने के लिए बैठो तो यही हाल होता है।

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ब्लॉगिंग का सफ़रः कैसा था साल 2014?

शिक्षा, समाज और मीडिया के पाठकों का बहुत-बहुत शुक्रिया। इस साल के सफ़र में आप कुछ क़दम हमारे साथ चले। तमाम मुद्दों पर होने वाली बातचीत में सहभागी बने, इसके लिए आपका बहुत-बहुत आभार।

भारतीय राजनीति में बदलाव का ‘नया दौर’

आज भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को अपनी सरकार का इस्तीफ़ा सौंप दिया. वहीं दूसरी तरफ़ गुजरात के मुख्यमंत्री और भारत के प्रधानमंत्री दिल्ली आए, यहाँ उनका भव्य स्वागत किया गया. सत्ता को विदा कहने और करीब आने का यह लम्हा लोगों को देखने को मिला. वहीं देर शाम बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने लोकसभा चुनावों में पार्टी की करारी हार की जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए, नैतिक आधार पर अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया.

16वीं लोकसभा चुनाव के नोट्स, अबकी बार, किसकी सरकार?

अबकी बार किसकी सरकार बनेगी, यह तो मतगणना के बाद ही पता चलेगी. लेकिन एक्ज़िट पोल्स पर आँख मूंदकर यक़ीन करें तो भाजपा का आना तय माना जा रहा है. लेकिन इस बार के चुनावों में काबिल-ए-ग़ौर बात यह रही है कि देश के सबसे महंगे चुनावों से महंगाई का मुद्दा गधे के सिर से सींग की तरह ग़ायब था. ऐसा लग रहा था मानो महंगाई कोई मुद्दा ही न हो. हाँ, ग़रीबी और बेरोजगारी का मसला ग़रीबी तबके के मतदाताओं और युवाओं को रिझाने के लिए खूब इस्तेमाल किए गए. इस पोस्ट में चर्चा चुनावों के दीर्घकालीन असर और प्रमुख मुद्दों की.

Love for the half moon

....When sea falls in love with full moon and wish to say I am in love with you. After some days the half moon comes to see the love of sea for the moon and make a picture of moon dancing in different shape, playing with dark and light...painting with black and white an imagery of colorful life.

डायरी कैसे लिखेें?

मेरी डायरी संजोती है मन की बातों को. वह मुझसे बतियाती है एक सहेली की तरह. मुझसे सवाल पूछती है जीवन की पहेली की तरह. मेरे ग़मों को अपना बना लेती है. मेरी ख़ुशियों को गले से लगा लेती है. आँसुओं को अपनी पनाह देती है. तन्हाई में साथ होती है. जीवन की राहों पर साथ चलती है. कभी-कभी भूल सी जाती है. अपनी दुनिया में खो जाती है. मैं अपने जीवन में व्यस्त हो जाता हूँ, लेकिन जब मिलते हैं तो मुस्कुराकर बड़ी आत्मीयता से मिलते हैं. दूर रहने के लिए बिना सॉरी कहे एक दूसरे को समझ लेते हैं. कोई शिकायत नहीं, कोई शिकवा नहीं...कोई रूठना नहीं कोई मनाना नहीं.