तुम्हारा ‘अकेलापन’

'अकेलेपन' का अहसास भी एक मनोवैज्ञानिक खेल है।

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कैसी बनती है कविता?

क्या हासिल है ऐसी बेवजह ,बेमकसद और बेमुकाम यात्राओं का जो कहीं ले नही जातीं। एक आकृति में गुम कर देतीं हैं जिसे हम भीड़ कहते हैं। जहाँ हमारी अपनी कोई स्वतंत्र पहचान नही होती ,हम भीड़ का हिस्सा मात्र होते हैं। उसी भीड़ में से कुछ आवाजें आती है। उन आवाजों में से एक … Continue reading कैसी बनती है कविता?

शाम आती है, शाम जाती है…कोई दास्तां सुनाती है

हर शाम का रंग अलहदा होता है। किसी शायर ने शाम औैर सुबह को समेटते हुए ज़िंदगी के बार में कहा, "सुबह होती है, शाम होती है। उम्र यों ही तमाम होती है।"

कविता लिखने का फार्मूला बताएं कैसे?

लिखने का शौक है तो लिखते चले जाइए...अपनी बातों को व्यक्त करते चले जाइए...सफ़र पर चलने वालों के सीखने का सिलसिला जारी रहता है. इसी सीखने के सिलसिले में पढ़ना भी शामिल है...लोगों से संवाद के सिलसिले लेखन के इस सफ़र को आगे ले जाते हैं.

उम्मीद के तिनकों पर ‘समंदर का पानी’

मलेशिया के लापता विमान को सत्रह दिन से ऊपर हो गए हैं. मलेशिया के प्रधानमंत्री ने मंगलवार को घोषमा की थी कि लापता विमान हिंद महासागर में खो गया है. सारे यात्रियों के मारे जाने की आशंका जताई है. विमान में सवार यात्रियों के दुःख को समर्पित एक कविता.

विश्व कविता दिवसः मेरे लिए क्या है कविता?

आज 'विश्व कविता दिवस' है. कविताएं लिखना और पढ़ना ख़ुशी देता है. कविता संवेदनशील मन की अभिव्यक्ति है. जो अपने शब्दों में अपनी बात कहता है. अनकहे संवाद के सिलसिले को आगे बढ़ाता है.

आईने में झांकती गौरैया…

विश्व गौरेया दिवस पर याद आती है एक नन्ही सी भोली फुदकने वाली चिड़िया. जो अपनी चीं-चीं की आवाज़ा कानों में घोलती है. अपने बच्चों के लिए दाना चुगती है, धूल में नहाती है और बारिश में भीगती है.