डायरी कैसे लिखेें?

डायरी क्या होती है? अगर यह नन्हा सा सवाल हमारे सामनेे हो तो इसके ढेर सारे जवाब हो सकते हैं. मसलन यह जीवन का संगीत होती है. जीवन की शायरी होती है. जीवन का रोज़नामचा होती है. ज़िंदगी का अखबार होती है. रोज़मर्रा के अनुभवों का सीधा बयान होती है.

डायरी लिखने की शुरुआत मन की बातों को अभिव्यक्ति देने की जरूरत से जन्म ले सकती है. डायरी लिखना रोज़ के अनुभवों को लिपिबद्ध करने का एक बहाना भी हो सकता है. डायरी लिखते समय हमें भाषा की ग़लतियों की परवाह किए बिना सीधे-सपाट शब्दों में अपनी बात लिखते चलना चाहिए.

लिखते समय मन में आने वाले सवालों, उलझनों, भावनाओं, हलचलों को ज़्यों का त्यों व्यक्त करने की कोशिश करनी चाहिए. डायरी में निजता का भाव होता है. यह हमारा वह स्पेश होता है, जहाँ हम खुद का सामना बिना किसी मुखौटे के करते हैं. डायरी लेखन के दौरान हम खुद को अपने ज़्यादा करीब होने का मौका देते हैं. इसमें भाषा का सवाल भी हो सकता है कि किस भाषा में डायरी लिखें तो जहाँ तक संभव हो अपनी मातृभाषा में लिखने की कोशिश करनी चाहिए. बाकी किसी नई भाषा में भी डायरी लिखी जा सकती है.

बारीक भावनाओं का सटीक वर्णन

डायरी में रोज़मर्रा के जीवन की बारीक भावनाओं का सटीक वर्णन होता है, यहाँ मन की तमाम ख़ुशियों और ग़मों को उचित स्थान दिया जाता है. जैसे कोई गीत बेइंतहा गुगगुनाने का मन हो रहा है, किसी पुराने दोस्त की याद आ रही है, कोई बात मन को बहुत ज़्यादा परेशान कर रही है, किसी को ग़ौर से देखना अच्छा लगता है, किसी का ख़्याल मन को गुदगुदा जाता है, ज़िंदगी का कोई सवाल आपको ख़ामोश कर जाता है…ऐसे जीवन के तमाम अनुभवों का सामना करना डायरी लिखना होता है.

इसके पहले कहा है कि डायरी ज़िंदगी का संगीत होती है तो जीवन के विविध रंगों की झलक डायरी में मौजूद होती है. यह हमारा आईना होती है जिसमें हम अपना चेहरा देख पाते हैं. वक़्त की आहट को महसूस कर पाते हैं. कई बार मैंने महसूस किया है कि डायरी में हमारे आने वाले वक़्त की झलक मिल जाती है.

डायरी लिखने की शुरूआत

डायरी के पन्नों पर विभिन्न रंगों में लिखे अक्षरों में से जीवन के विविध रंगों और भावनाओं को महसूस किया जा सकता है. मैंने डायरी लिखने की शुरुआत अपने मन के जंगल में पनपने वाले सवालों के बियाबान से बाहर आने की तड़फ़ के साथ शुरू हई. पहली बार चाँद की सुंदरता, मोहब्बत की कविता, बहती नदीं के प्रति प्रेम, अनदेखे समंदर की कल्पना ने डायरी के पन्नों में ही आकार लिया.

आज तक कभी समंदर नहीं देखा. केवल नदी से ही वास्ता रहा है, लेकिन जीवन के अनुभवों से सीखा कि निरंतर गतिशीलता और बदलाव जीवन का सत्य है. नदी इस सच्चाई को रोज़ जीती है. इस दृश्य को बहुत करीब से रोज़ाना बनारस में घाट के किनारे रहने के दौरान बहुत करीब से देखा है. शहरों की ओर पलायन के बाद से जीवन से रीतती ख़ुशियों और अनुभवों के विस्तृत होते फलक के साथ कुछ कोने के अहसास को बड़े करीब से महसूसने का मौका मिला.

मेरी डायरी यानि मेरी सहेली

मेरी डायरी संजोती है मन की बातों को. वह मुझसे बतियाती है एक सहेली की तरह. मुझसे सवाल पूछती है जीवन की पहेली की तरह. मेरे ग़मों को अपना बना लेती है. मेरी ख़ुशियों को गले से लगा लेती है. आँसुओं को अपनी पनाह देती है. तन्हाई में साथ होती है. जीवन की राहों पर साथ चलती है. कभी-कभी भूल सी जाती है. अपनी दुनिया में खो जाती है. मैं अपने जीवन में व्यस्त हो जाता हूँ, लेकिन जब मिलते हैं तो मुस्कुराकर बड़ी आत्मीयता से मिलते हैं.

दूर रहने के लिए बिना सॉरी कहे एक दूसरे को समझ लेते हैं. कोई शिकायत नहीं, कोई शिकवा नहीं…कोई रूठना नहीं कोई मनाना नहीं. बस एक दूसरे को समझ लेना. एक-दूसरे को ज़्यों का त्यों स्वीकार कर लेना. बिना कोई सवाल किए हुए, बिना कोई शक किए हुए. निरंतर बनी रहने वाली दो-तरफ़ा मोहब्बत की तरह. एक ऐसा प्यार और अपनापन जो समय के साथ और गहरा होता चला जाता है. संवाद के सिलसिले नदी के धारे की तरह बहते रहते हैं. अंततः समंदर में मिल जाने के लिए.

लेकिन डायरी में इस अंत की बजाय निरंतरता और नवीनता का पुट सदैव बना रहता है. समंदर की लहर की तरह पूरी ऊर्जा के साथ तट की और दौड़ता और पत्थरों से पछाड़ खाकर गिरता है. यह सिलसिला निरंतर चलता रहता है.

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12 comments

  1. बहुत खूब. वास्तव में दिल कि गहराईयों के साथ आपने यह लेख लिखा है जिस मुझे कुछ भी बनावटी नहीं लग रहा है बल्कि आपकी हुबहू तस्वीर नज़र आ रही है. अपनी बात को कहने के लिए आपने जिन शब्दों का तानाबाना बुना है वोह भी सराहनीय है.

  2. मुझे तो समझ नहीं आरहा था की मैं डेरी कैसे लिखू आप ने तो अपने जीवन का आइना दिखाकर मुझे सोचने पर मजबूर कर दिए
    की जीवन का वास्तविक सच क्या है और हमें किस तरह से अपने ख़यालात को समेट कर रखनी चाहिए
    बहुत बहुत धन्यवाद ।

  3. Me aap lolgo ko lekin me use pehle ek bath bolna chahata hu me aajkal 10 and 13, 14 16 , 15, 17 ,18 saalke bachche galath soch me bash na vale bachxhe aapni gindagi ko barvadh kardetehai or unke sarier me ala bala ki presani aa jati hai or unki soch ek esi hojati hai me vo apnaap per control nahi ker pate hai out unka givan pura barvath ho jata hai or is life me hear ma or papa sent kehna chatha hu ki upne bachcha ka dhiyan rakhe thannavath

  4. Me aap lolgo ko lekin me use pehle ek bath bolna chahata hu me aajkal 10 and 13, 14 16 , 15, 17 ,18 saalke bachche galath soch me bash na vale bachche aapni gindagi ko barvadh kardetehai or unke sarier me ala bala ki presani aa jati hai or unki soch ek esi hojati hai me vo apnaap per control nahi ker pate hai out unka givan pura barvath ho jata hai or is life me hear ma or papa sen ir un ka padhi me bhi man nahi lagta hai or un ka dimakh bhi kamgur ho gata haikehna chatha hu ki upne bachcha ka dhiyan rakhe thannavath

  5. Lot of thanks for for given diary writing tips on google

    अगर आप ये डायरी लेखन टिप्स गुगल पर पोस्ट नही करते ते मैं कभी न सिख पाते।

    Thanks so much

    • आपका बहुत-बहुत शुक्रिया कि आपको इस पोस्ट से मदद मिली। आपके शब्दों को पढ़कर अच्छा लगा कि इसके लिए निकाला गया वक्त सार्थक है।

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