कविता लिखने का फार्मूला बताएं कैसे?

आज की ज़िदगी में कविता की जरूरत है. पहले से कहीं ज़्यादा है. लेकिन ज़िंदगी से कविता सुकून की तरह ग़ायब हो गई है. लोग कविताओं की तलाश कर रहे हैं. कविता लिखने का फार्मूला खोज रहे हैं. इसे कविताओं के प्रति इज़ाहार-ए-मोहब्बत कहा जा सकता है.

कभी-कभी ऐसा लगता है कि कविता के फार्मूले की खोज लिखने के बियाबान में खो जाती है. लिखने का काम श्रमसाध्य है. मेहनत माँगता है. धैर्य माँगता है. छोटी-छोटी बातों को भावनाओं की नज़र से देखने की दरकार होती है. टूटी-फूटी भाषा में भी मन की बात रखने की जरूरत होती है. ज़िंदगी में यथार्थ के बंधनों की कल्पना की ऊंची उड़ान से पार करने की जरूरत होती है. लेकिन इसके लिए कुछ करना नहीं होता…लोग तो कहते हैं कि दर्द जब हद से गुजर जाता है, दवा बन जाता है.

जीवन में जब सवालों का तूफ़ान उठने लगता है. मोहब्बत की भावनाएं उफान मारने लगती है. अंदर कुछ कहने की लालसा होती है तो शब्दों के अभाव को पूरा करने के लिए कविता का अवतरण होती है. कविताएं चुपचाप चली आती हैं. भाषा और व्याकरण की दीवारों को तोड़ते हुए. कविताएं जीवन को अपनी मौजूदगी से तरंगित कर जाती हैं. जीवन के समंदर में कविताओं के गिरने से उठने वाली लहरें जीवन को संवेदनाओं के बड़े सूक्ष्म स्तर पर प्रभावित करती है. कविताएं ज़िंदगी का नज़र-ए-आईना बन जाती हैं. लेकिन कविताएं लिखने की शुरूआत भले तुकंबदी के फार्मूले से होती हो. लेकिन धीरे-धीरे छोटी-छोटी बातों को लयात्मक अंदाज़ में गुनने-बुनने और साझा करने से भी कविताओं के बनने का सिलसिला शुरू होता है.

कविताओं की शुूरुआत के साथ-साथ इनके रूठने का दौर भी जीवन में आता है. ऐसे में कविताएं जीवन से रूठ जाती हैं और न जाने किस लोक में चली जाती हैं…हमें वास्तविकता की दुनिया में अकेला छोड़कर. फार्मूला वन के रेस सरीखी ज़िंदगी की दौड़ में शामिल होने के बाद धीरे-धीरे कविताएं…..मानो लुप्त होने लगती है. यह कविताएं जीवन की खिड़की की तरह होती हैं, जो जीवन में नए विचारों की आवाजाही की प्रक्रिया को निरंतरता देती है. जीवन में संवेदनशीलता को स्थान देती हैं. भावनाओं को तर्क से बेपरवाह होकर जीने का हौसला देती हैं. लेकिन कविताओं की दुनिया भाषाओं के व्याकरण का अतिक्रमण करते हुए अभिव्यक्ति के तमाम रास्तों को खोलती हैं. कविताओं से आगे गद्य लेखन की दिशा में सारी प्रक्रिया आगे बढ़ती है. वर्तमान में कविताओं में लय का अभाव है. आज की कविताओं से लय ग़ायब है. संगीत गायब है. प्रवाह ग़ायब है. यह जिनके पास बचा है. वह उनके जीवन और सोच में मौजूद संगीत और कल्पना की वज़ह से ज़िंदा है.

अगर सच कहा जाए तो लिखने का फार्मूला खोजना…गुलजार बनने का टॉनिक तलाशने जैसा ही है. अगर लिखने का शौक है तो लिखते चलिए …अपनी भावनाओं को शब्द देते चलिए. हो सकता है कविताओं की नज़र-ए-इनायत आप पर भी हो जाए. इस सफ़र पर चलने वालों के सीखने का सिलसिला जारी रहता है. इसी सीखने के सिलसिले में पढ़ना भी शामिल है और लोगों से संवाद भी जो लेखन के इस सफ़र को कविताओं तक ले जाता है तो कभी कविताओं से आगे भी..।

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23 comments

  1. झरना स्रोत पर ही सूखा हुआ हो तो प्रवाह कैसे बनेगा? कविता, कहानी या नाटक का स्वरूप तो बाद में निर्धारण होगा पर पहले जीवन पीया तो जाए… आँख से जगत को देखें या औरों के देखे हुए को पुस्तकों में देखें आँख और कान जैसे सम्वेदना मार्गों से रस भरने लगेगा तो कलम या जबान के मार्ग से झरना अपने आप फूटने लगेगा। अपने अनुभव से कह रहा हूँ जी अभी तो मैं भी कभी कभी ही छलक पाता हूँ।

    • आपने बिलकुल सही कहा सुरेश जी हम रोज तो कविता नहीं लिख सकते पर हमारे अंदर कविता लिखने का अनुभव हो और बातों की गहराई को समझ सकने की शक्ति हो तो कविता खुद हमारे कलम उठाने पर मजबूर कर देती है……कविता हमें जीवन के बोहत से सच समझाती है जीवन जीने का तरीका बतलाती है……कविता मानों हमारे जीवन में रंग भर देती है/

      • कविता लिखने से पहले यह जानना बहुत आवश्यक है कि कविता क्या है ?

  2. बहुत-बहुत शुक्रिया सुरेश जी, झरने, पानी और प्रवाह का गहरा रिश्ता है. मन में कहने के लिए जज्बातों और भावनाओं का होना काफ़ी जरूरी है. हमारे एक मित्र कहते हैं कि कविता एक विचार है. कविता सोचने का एक तरीका है. जिसमें हम ख़ास तरीके से चीज़ों को ददेखने की कोशिश करते और अपनी भावनाओं को कविता वाले फार्मेट में सामने रखते हैं. आपके अनुभव सच्चाई के बेहद करीब हैं…रोज़ कविता लिखना संभव नहीं होता है. जब भाव होते हैं तो कविता हमसे खुद को लिखवा लेती है…कभी-कभी तो ऐसा भी लगता है.

    • सही है। विर्जेश जी, http://supportinghands.blogspot.in/2008/10/why-we-are-suffering-from-life-style.html मेरा ब्लोग है। आप किसी भी नाम,रूप, आकार से मेरी सामग्री उपयोग करने के लिए स्वतंत्र हैं। बस ऐसे लोगों की तलाश है मुझे जो शिक्षा में आमूल परिवर्तन की आवश्यकता अनुभव करते हैं।

      • Mein app ka sishu hoha aj se
        Kibhi to didar hoga
        App hoge mere samne
        Munch pe mera kirdar hoga
        Pari pana Guru ji

      • ji sir mai bhi ab tak kai kavita likha hu par mai hindi sahitya ki bhasha se dur hu ham jo bhasha bolte h asan bhasha isi bhasha me hi likhta hu or mere kai dost or milne walo ko kafi pasand aata h bolte h bahut upar tak jayega par bina guru koi itna upar kese ja sakta h mujhe talash h ek sachche guru ki jo mujhe achha margdarshan de sake mai ab tak jinhe bhi suna hu or padha hu mai un sabka jabaw likhte aaya hu agar ap mujhe sahi margdarshan de sakte h to mere guru banane ki krpya kare yadi ni to mujhe achha or sachcha guru se milwaye ki saheta kare ap ki mahan krpa hogi

    • बिल्कुल virjesh जी आपके दोस्त बिल्कुल सही कहते है।
      कविता एक ऐसी सकारात्मक सोच है जो जो हमे शब्दो के जरिए दुनिया को जानने का प्रयास करती है और सबको इस बात से परिचित भी कराती है।

    • सच कहा आप लोगो ने अभी तक में भी नहीं समझ सका था

    • शांत चीत में बैठकर भी अस्मर्णिय कविता कहानियाँ लिखी जा सकती है !!!
      आप लोग मेरा सहयोग करे मै अपनी जीवन की पहली कविता लिखने जा रहा हूँ मेरा व्हाट्स नम्बर 880888214 आप लोग आमंत्रित है सहयोग के लिये….

    • कविता लिखने के बारे में आप कुछ लिखिए. बहुत सारे लोग जानना चाहते हैं कि कविता कैसे लिखी जाती है.

  3. Kavita likhne ke liye sabse pehle eksha sakti chahiye hoti hai ya fir mai yun kanhu ki kavita likhi nhi jati balki Apne aap likhawa di jati hai. Kam se kam mai to kabhi aise samay kavita nhi likh pata hu .jaise abhi betha hu aur kavita likhne langu aise mere se to kavita ki ak line bhi nhi likh pata hu.
    Ha par jab mai tv samachar patra aur jagah kisi news ya internet par koi article padhta hu to mera man Vitrishnao se bhar jata hai jab mai aise koi news article pad leta hu jaise garibo ka soshan ,Aytaychar aur sabse jada muje pravhabit karta hai Behano ka rape.Tab mere man se achanak se ak kavita apne aap tyar hone lagti hai .
    Us samay ye maiyene nhi rakhta ki rat ke 1bj rahe hai ya 3 .Infact jada kavitaye maine rat ke 3 bj hi likhe hai .jis samay andar se kavita likhne ki abhilasha jagrit hoti hai us samay mai sote samay bhi uth jata hu bayetha nhi raha jata jab tak ki likhna na suru kar du.
    Kavita kaise likhe
    ————————–
    1.ji visya par aap kavita likhna chahte hai us par kafi research kare ,us sambandh me kitabe padhe,internet me us se sambandhit subject ko khoj kar gahrayi se padhe.iska fayda ye hota hai ki aap ke man me ak rup rekha tayiyar ho jati hai aur jab aap kavita likhte hai to usme aap ko sochana nhi padta.

    2.dushra sabse mahatopurn ye hai ki aap dushre longo ki kavitaye padhe .Sune aur ho sake to adhik se adhik kavi sammalen ke audio vedio sun ne se aap me bhi us sayili ka vikash ho jata hai.

    Likhne ke liye to aur bhi hai lekin samay kam hone ke karan chama chahta hu.

    Aap humse mil sakte hai
    twitter.com/aimwanttoiit
    fb.com/ramkinkardastripathi1
    Aur humari kavitayo ke liye visit kariye humari website
    http://ramkinkardastripathiblog.wordpress.com
    Aap humse Whatsapp se bhi jud sakte hai Keval writer plz
    +919649676563(no call plz)

  4. कविता सुनने सुनाने से भी पहले उसकी पृष्ठभूमि के बारे मे गहराई से मनन जरूरी है अगर ऐसा हुआ तो ये संभव है कि शब्द तो उभर ही आयेंगे फिर आप उनको किन उंचाईयों से अवगत करातें है ये आपकी इच्छा शक्ति और मेहनत पर निर्भर करता है

  5. kavita bhavo ka sagar hai isliye apne man ke bhavo ko shrankhlabadh rup men sansar ke samkaksh prastut karna kavita ka hi rup hai

  6. मैं जब कविता बुनने लगता हूँ
    शब्दों को माला में पिरोने लगता हूँ
    अक्षर सारे हिलने लगते हैं
    शब्द भी हँसने लगते है
    मैं भी साथ में हँसने लगता हूँ
    मैं जब कविता बुनने लगता हूँ

    गणित में तो मैं अव्वल हूँ
    सूत्र कहीं मुझसे ऐसा बन जाए
    जिससे कविता पूरी हो जाए
    मैं शब्दों में गुणा भाग करने लगता हूँ
    मैं जब कविता बुनने लगता हूँ

    बिन भावो के मंजिल तक कैसे पहुंचूंगा
    छोटे-बड़े शब्दों से सीढ़ी कोई बन जाए
    कविता मेरी अलंकारो से सज जाए
    पन्ने पलट रस छन्दों को ढूँढने लगता हूँ
    मैं जब कविता बुनने लगता हूँ

    मेरी कविता मेरी इबादत
    तो तेरी कृपा कुछ ऐसी हो जाए
    जिस पर भी निगाह पडे
    गोविन्द, दर्शन तेरा हो जाए
    मैं इन्सा में तुझे देखने लगता हूँ
    मैं जब कविता बुनने लगता हूँ

    जिन्दगी नजर ऐ आइना बन जाए
    जो एक बार तू मिल जाये
    तेरी लीलाओं को सुन-पढ़ कर
    मैं आनन्दित होने लगता हूँ
    मैं जब कविता बुनने लगता हूँ

  7. कविता के आंगन में क्षणभर
    सभी रसों का भाव भरकर
    सूक्ष्म में भी विशालता का दर्शन हो जाता है,
    आप जैसे गुणीजनों की कविता पढ़कर।

  8. Apne sahi kaha brijesh ji ki kabita har time Nahi likhi ja sakti hai uske liye ek bisesh time or uchit jagah honi chahiye taki hamera dhyan akagra ho sake. Dhanyavad.
    Hame bhi kabita likhne ke kuchh niyam bataye.

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