तुम्हारा ‘अकेलापन’

'अकेलेपन' का अहसास भी एक मनोवैज्ञानिक खेल है।

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रिश्तों की खुशी कहां खो गई?

आज एक दीदी से कई सालों बाद बात हो रही थी। मैंने संगीत की उनकी रुचि के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि संगीत की तरफ़ वापसी अब बहुत मुश्किल है। अब तो आगे ही देखना है। बच्चों की पढ़ाई और बाकी सारी जिम्मेदारियां हैं। अपनी किसी सहेली से बात करो तो भी पति … Continue reading रिश्तों की खुशी कहां खो गई?

ज़िंदगी की फ़िल्मःहिट और फ्लॉप का शो तो लगता रहता है!!

ज़िंदगी को किसी फ़ार्मूले में बाँधा जा सकता है? यह तो किसी फार्मूले में फिट और हिट होने के बाद फिर फ्लॉप होने वाली फिल्म की तरह है जिसे हमेशा नई स्क्रिप्ट, कहानी और किरदारों की दरकार होती है. और एक अच्छे निर्देशन की भी. जब कभी परिस्थितियों से सारी चीज़ें एक साथ मिलती हैं … Continue reading ज़िंदगी की फ़िल्मःहिट और फ्लॉप का शो तो लगता रहता है!!